Sunday, August 30, 2009

रस्सी...

# # #
रहने देता है
कौन सीधा
रस्सी बेचारी को ?
इख्तियार-ए-गैर में
हुआ करती है
वह तो,
देकर गाँठ
उसको
अपने मन की,
हो बेफिक्र
किनारे
हो जाता है
खुदपरस्त
इंसान....

No comments:

Post a Comment