Thursday, June 10, 2010

एक नोट खुद को...

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जब भी कहती हूँ:
"मैं हूँ प्रकृति के साथ."
होता है
मेरा भावार्थ
दूर भागना
मानवों से.

वन और
ग्राम को
करना ही
प्रेम है
यदि:
"होना प्रकृति
के साथ."
तो
करना प्रेम
शहर और
'माल्स' के संग,
क्यों नहीं
कहला सकता :
"होना मानव के साथ."
"होना प्रकृति के साथ"

क्या 'मनुष्य'
नहीं है
अभिन्न अंग
प्रकृति का ?

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